फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर बनाया डिजिटल अरेस्ट का दबाव — सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज भेजकर रुपये ट्रांसफर करने के लिए किया मजबूर

फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर बनाया डिजिटल अरेस्ट का दबाव — सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज भेजकर रुपये ट्रांसफर करने के लिए किया मजबूर

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 55 लाख रुपये की साइबर ठगी — रतलाम पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 15 लाख रुपये फ्रीज, 20 लाख की अतिरिक्त ठगी होने से रोकी//

 

रतलाम | दिनांक 19/09/2026

रतलाम में साइबर ठगों द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक व्यक्ति से करीब 55 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने स्वयं को पुलिस एवं एटीएस अधिकारी बताकर पीड़ित को फर्जी आपराधिक प्रकरण में फंसाने का भय दिखाया तथा लगातार वीडियो कॉल एवं फोन के माध्यम से निगरानी में रखते हुए उससे अलग-अलग बैंक खातों में राशि ट्रांसफर करवाई।

मामले की जानकारी मिलते ही परिजनों द्वारा रतलाम साइबर सेल से संपर्क किया गया। साइबर सेल एवं थाना माणकचौक पुलिस की त्वरित कार्रवाई से NCRP पोर्टल के माध्यम से ठगी की राशि में से 15 लाख रुपये फ्रीज करवाने में सफलता मिली है। वहीं पीड़ित द्वारा ठगों के कहने पर अतिरिक्त 20 लाख रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही थी, जिसे साइबर सेल के पुलिसकर्मी एवं परिजनों की समझाइश से समय रहते रोक लिया गया।

घटना का विवरण–
पीड़ित, जो कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करता है तथा कुवैत में निवास भी करता है, को दिनांक 15 सितंबर 2026 को रतलाम में ही था इस दौरान अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को महाराष्ट्र के कोलाबा का पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए पीड़ित के मोबाइल नंबर, व्यवसाय एवं भारत में रहने संबंधी जानकारी पूछी।
इसके बाद साइबर ठगों ने एक अन्य मोबाइल नंबर के संबंध में पूछताछ करते हुए दावा किया कि वह नंबर पीड़ित के नाम पर जारी हुआ है तथा उस नंबर से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट से संपर्क किया गया है। इस प्रकार पीड़ित पर गंभीर आपराधिक मामले में फंसने का भय बनाया गया। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन एवं व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर स्वयं को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं एटीएस अधिकारी बताया गया। ठगों द्वारा पीड़ित से आधार कार्ड एवं पैन कार्ड सहित अन्य व्यक्तिगत जानकारी भी प्राप्त की गई तथा उसे बताया गया कि उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज है।
साइबर ठगों ने व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ित को पुलिस यूनिफॉर्म में दिखाई दे रहे व्यक्तियों के वीडियो कॉल किए तथा स्वयं को एटीएस अधिकारी बताया। इसके अलावा हथियारों से संबंधित फोटो एवं अन्य दस्तावेज भेजकर उनमें व्यक्तियों की पहचान करने के लिए कहा गया।ठगों ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज भी पीड़ित को भेजे तथा उसके विरुद्ध प्रकरण दर्ज होने की बात कही। इसके बाद कथित रूप से राशि के सत्यापन के नाम पर पीड़ित से बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

दो दिनों में 55 लाख रुपये कराए ट्रांसफर–
ठगों के दबाव एवं भय के चलते पीड़ित द्वारा दिनांक 17 सितंबर 2026 को 35 लाख रुपये तथा दिनांक 18 सितंबर 2026 को 20 लाख रुपये, कुल 55 लाख रुपये, साइबर ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए गए। पीड़ित को विश्वास था कि सत्यापन के बाद यह राशि उसे वापस कर दी जाएगी।

परिजनों की सतर्कता से 20 लाख की अतिरिक्त ठगी रुकी–
पीड़ित आज घर पर अकेला ही था। पीड़ित के परिवार द्वारा आज उससे संपर्क करने का प्रयास किया गया। पीड़ित द्वारा फोन का जवाब नहीं देने पर उसकी पत्नी ने रतलाम में मौजूद रिश्तेदारों से संपर्क किया। बाद में संपर्क होने पर परिजनों को पता चला कि पीड़ित हड़बड़ी मे लग रहे है और बड़ी राशि ट्रांसफर करने के संबंध में बात कर रहे है।
परिजनों ने तत्काल रतलाम साइबर सेल से संपर्क किया। उस समय पीड़ित द्वारा ठगों के कहने पर अतिरिक्त 20 लाख रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही थी। साइबर सेल के प्रधान आरक्षक लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी एवं परिजनों द्वारा पीड़ित को समझाइश देकर अतिरिक्त राशि ट्रांसफर करने से रोका गया। इसके बाद साइबर सेल एवं थाना माणकचौक पुलिस द्वारा पीड़ित की काउंसलिंग की गई तथा उसे समझाया गया कि वह साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आ गया है।

NCRP पोर्टल की मदद से 15 लाख रुपये फ्रीज–
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रतलाम श्री अमित कुमार (भा.पु.से.) द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विवेक कुमार एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राकेश पंद्रो के मार्गदर्शन में साइबर सेल एवं थाना माणकचौक पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
थाना माणकचौक प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह चौहान, साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक जीवन बारिया एवं साइबर सेल की टीम द्वारा तत्काल तकनीकी कार्रवाई प्रारंभ की गई। टीम द्वारा NCRP पोर्टल के माध्यम से संबंधित बैंकिंग चैनल में त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपये की राशि फ्रीज करवाने में सफलता प्राप्त की गई। मामले में E-FIR दर्ज कर ली गई है तथा ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी एवं शेष राशि की रिकवरी के लिए पुलिस टीम गठित कर आगे की विवेचना एवं तकनीकी जांच की जा रही है।

रतलाम पुलिस की नागरिकों से अपील–
रतलाम पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कोई भी पुलिस अधिकारी, CBI, ED, NCB, TRAI, ATS अथवा सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फोन या वीडियो कॉल कर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति फोन/वीडियो कॉल पर स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, एफआईआर, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, सिम कार्ड अथवा किसी अन्य आपराधिक मामले का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने को कहता है, तो यह साइबर ठगी का संकेत है। ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें अथवा नजदीकी पुलिस/साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क करें।

रतलाम पुलिस — साइबर अपराध के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई, नागरिकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता।

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Nayan Vyas

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