‘एक रचनाकार का रचना संसार’ आयोजन :
रचनाकार अपने दौर की तकलीफों से बनता है - प्रो. चौहान

‘एक रचनाकार का रचना संसार’ आयोजन : रचनाकार अपने दौर की तकलीफों से बनता है - प्रो. चौहान

रतलाम । हर दौर की अपनी तकलीफें होती हैं और हर दौर का अपना मिज़ाज । रचनाकार अपने समय से सीखता भी है और अपने आप को उस समय के अनुरूप ढालता भी है। दानिश अलीगढ़ी भी ऐसे ही रचनाकार रहे जिन्होंने गमे-जानां से गमे-दौरा तक अपनी रचना प्रक्रिया को निभाया। उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित एक ‘रचनाकार का रचना संसार श्रृंखला’ के तहत मरहूम शायर दानिश अलीगढ़ी पर केंद्रित आयोजन में वरिष्ठ कवि, अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए ।उन्होंने कहा कि जिस दौर में दानिश अलीगढ़ी ने अपनी रचना प्रक्रिया की , उसमें उन्होंने ग़ज़ल के पारंपरिक स्वरूप के साथ उस दौर की तकलीफों का भी ज़िक्र किया है । यही उनकी रचनाओं की प्रासंगिकता है ।
इस अवसर पर दानिश अलीगढ़ी के पुत्र जावेद ख़ान ने कहा कि साहित्य समाज ने दानिश साहब के नाम को जीवंत बनाए रखा है , यह सुखद है । आज भी उनकी रचनाएं रतलाम के साहित्यकारों द्वारा समय-समय पर प्रस्तुत की जाती है , इससे पता चलता है कि हमारे पिता सभी के कितने प्रिय थे । दानिश अलीगढ़ी के शागिर्द शायर सिद्धीक़ रतलामी ने कहा कि दानिश साहब ने अदब की बहुत खिदमत की। कई बड़े शायरों को मंच पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । उनकी ग़ज़लों को कई बड़े गायकों ने प्रस्तुत कर उन्हें सम्मान भी प्रदान किया ।

इन्होंने किया रचना पाठ

इस अवसर पर दानिश अलीगढ़ी की रचनाओं का पाठ वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास , संजय परसाई ‘सरल’, विनोद झालानी , लक्ष्मण पाठक, आशीष दशोत्तर ने किया । कार्यक्रम में कीर्ति शर्मा, हीरालाल खराड़ी , रशीद मंसूरी , नरेंद्र सिंह चौहान, मांगीलाल नागावत , चरण सिंह यादव सहित सुधिजन मौजूद थे।

अगला आयोजन नंदलाल उपाध्याय पर होगा

एक रचनाकार का रचना संसार श्रंखला की पांचवीं कड़ी में 14 सितंबर को वरिष्ठ कवि रहे नंदलाल उपाध्याय ‘ अतुल विश्वास ‘ की रचनाओं का पाठ शहर के सुधिजन करेंगे ।

Share This Post

Nayan Vyas

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!