समकालीन कविता विषमताओं में मनुष्यता के बीच पुल बना रही जनवादी लेखक संघ के आयोजन में प्रो.रतन चौहान की पुस्तक का विमोचन

समकालीन कविता विषमताओं में मनुष्यता के बीच पुल बना रही  जनवादी लेखक संघ के आयोजन में प्रो.रतन चौहान की पुस्तक का विमोचन

रतलाम। समकालीन कविता के सामने इस समय बहुत से संकट हैं । अभिव्यक्ति से लेकर ईमानदारी, प्रतिबद्धता से लेकर दृढ़ता और मुखरता से लेकर गहनता । सभी के बीच आज के कवि को एक पुल बनाना पड़ रहा है । उस पुल को मज़बूत करना पड़ रहा है । उस पर चलने का हौसला दिखाना पड़ रहा है और स्वयं को विषमताओं के अंधड़ में खड़ा रखना पड़ रहा है । समकालीन कविता के महत्वपूर्ण कवि और अनुवादक रतन चौहान ऐसे झंझावातों के बीच अपनी कविता को मुस्तैदी से लेकर खड़े हैं । अपनी कविता के ज़रिए तूफानों को चुनौती दे रहे हैं । अपनी शालीनता के साथ प्रतिबद्धता को लेकर चल रहे कवि रतनजी अपने हाल ही में प्रकाशित कविता संग्रह ‘ मैं अभी मृत्यु के बारे में नहीं सोच रहा हूं ‘ में हमारे इस विश्वास को मज़बूत करते हैं।
उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा कवि और अनुवादक प्रो. रतन चौहान के काव्य संग्रह ‘ मैं अभी मृत्यु के बारे में नहीं सोच रहा हूं ‘ के विमोचन अवसर पर उपस्थित रचनाकारों ने व्यक्त किए ।
इस अवसर पर प्रो. चौहान ने कहा कि कविता और जीवन में अंतर नहीं होता है। जीवन के उतार-चढ़ाव कविता में आते हैं। कविता जीवन की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि शहर के रचनाकारों ने इतना अधिक स्नेह करते हैं जिसके लिए मैं उनका ऋणी हूं।
जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ जावेदी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की कामयाबी इस बात से तय होती है कि उसे कौन लोग सुन रहे हैं । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसे कितने लोग सुन रहे हैं । भीड़ के लिए कभी कोई रचनाकार चाह नहीं करता है । वह अपनी रचना के माध्यम से समाज से संवाद करता है । वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास ने कहा कि एक रचनाकार सदैव सीखने की प्रक्रिया में होता है। प्रो. चौहान इतनी उपलब्धियों के बाद भी अपनी विनम्रता और अपने ज्ञान के साथ हमारे बीच सदैव उपस्थित रहते हैं , यह हमारा सौभाग्य। शायर सिद्दीक़ रतलामी ने कहा कि किसी भी रचनाकार की सभी रचनाएं श्रेष्ठ नहीं होती है। याद वही रचनाएं रहती हैं जो बेहतर हो। कवि का मूल्यांकन समग्रता में होना चाहिए।
पुस्तक पर टिप्पणी करते हुए युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर ने कहा कि तमाम मुश्किलों, तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद आज भी रतन चौहान जैसे रचनाकार प्रतिबद्धता के प्रतिमानों को कायम रखे हुए हैं । इस संग्रह की रचनाओं से गुज़रने पर महसूस होता है कि असली कविता हमारे बीच ही मौजूद है । जलेसं सचिव रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि चौहान सर की रचनाशीलता हमें प्रेरित करती है। इन रचनाओं का व्यापक फलक है।

महिला रचनाकारों ने किया विमोचन
काव्य संग्रह का विमोचन महिला रचनाकारों इन्दु सिन्हा, डॉ. स्वर्णलता ठन्ना , पुष्पलता शर्मा, गीता राठौर , डॉ. प्रवीणा दवेसर , डॉ. ख़ुशबू जांगलवा, सरिता दशोत्तर, आशा श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर काव्य संग्रह से प्रमुख रचनाओं का पाठ विनोद झालानी, आई.एल.पुरोहित, आशा श्रीवास्तव , सरिता दशोत्तर , इन्दु सिन्हा, रणजीत सिंह राठौर ने किया।

इनकी रही मौजूदगी

आयोजन में संग्रह पर महत्वपूर्ण बातचीत में डा. प्रदीप सिंह राव, डॉ. एन.के. शाह, ओमप्रकाश मिश्र, गजेन्द्र सिंह राठौर, डॉ. जी.पी.डबकरा, मांगीलाल नगावत, जितेन्द्र सिंह पथिक, गजेन्द्र सिंह चौहान, नरेन्द्र सिंह पंवार, कला डामोर, रणजीत सिंह राठौर, महावीर वर्मा, कीर्ति शर्मा, जी.एस.खींची, कैलाश वशिष्ठ, शिवराज जोशी, नवनीत मेहता, कपिल जोशी, श्याम सुंदर भाटी, नरेंद्र सिंह डोडिया, पद्माकर पागे, संजय परसाई ‘सरल’, प्रकाश हेमावत, सुभाष यादव, एस.के. मिश्रा, दुष्यंत कुमार व्यास, चरणसिंह जाधव, सत्यनारायण सोढ़ा ने विचार व्यक्त किए। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया तथा आभार गजेंद्र सिंह राठौर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर शहर के सुधिजन मौजूद थे।

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