रतलाम, 22 जुलाई। रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय का 23 जुलाई को भव्य मंगल प्रवेश होगा। रतलाम में 13 वर्षों बाद हो रहे उनके चातुर्मास को लेकर गुरूभक्तों में अपार उत्साह है। बुधवार सुबह प्रवचन से पूर्व 500 से अधिक लोगों ने महालक्ष्मी परिसर में भक्तामर पाठ किया। कई भक्तों ने तप, त्याग और तपस्या के प्रत्याख्यान लेकर इसकी भी शुरूवात कर दी।
मालव केसरी प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य पंडित रत्न पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा के साथ इस वर्ष उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा भी चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश करेंगे। उनका प्रवेश जुलुस सुबह 8 बजे किरण टाकीज स्थित महालक्ष्मी परिसर से आरंभ होगा और नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ मोहन टाकीज पहुंचेगा। मोहन टाकीज में चातुर्मास प्रवेश सभा होगी।
श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल ने समाजजनों से प्रवेश जुलुस में अधिक से अधिक उपस्थित रहने का आव्हान किया है।
स्पर्श इंद्री से सावधान रहने का आव्हान
बुधवार सुबह प्रवर्तकश्री ने महालक्ष्मी परिसर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्पर्श इंद्री से सावधान रहने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि कई लोग अच्छे स्पर्श के लिए घरों में चिकनी टाइल्स आदि लगाते है, लेकिन उन्हीं पर फिसल कर लोग गिरते भी है। अपनी इंद्रियों को वश में रखकर जीवन जीने वाला कभी दुखी नहीं होता, इसलिए अन्य इंद्रियों के साथ स्पर्श इंद्री के आकर्षण से भी बचना चाहिए। महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने इससे पूर्व शब्दों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मंत्र का एक-एक शब्द बहुत मायने रखता है, आज भक्तामर पाठ के जिन शब्दों को सबने वाचन किया, उनका विशिष्ठ महत्व है। मनुष्य को हर शब्द सोच-समझकर बोलने का प्रयास करना चाहिए। इससे जीवन में कभी अशांति नहीं आएगी। प्रवर्तकश्री से कई भक्तों ने तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा का संचालन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने किया।
